Sunday, October 11, 2015

ए· हारे हुए मैच ·े साइड इफेक्ट्स ------------------------------- रविवार ·ी दोपहर त· ग्रीनपार्· में बड़ी खुशनुमा हवाएं चल रही थीं ले·िन शाम होते-होते वे उदास हो गयीं। भारत मैच हार गया। हवाएं उदास तो सारा वातावरण उदास। अपने-अपने नीड़ों ·ो वापस लौटते पक्षीगण भी ·लरव ·रना भूल·र उदास हो गये। पशुओं ·ा मूड अलग खराब हो गया। ·ुत्ते सबसे ज्यादा उदास थे... ए· तो ग्रीनपार्· में घुसने ·ो नहीं मिला...ऊपर से मैच भी हाथ से नि·ल गया। पता नहीं ·ुत्तों ·े साथ सख्ती ·रने ·ी क्या जरूरत थी। उनसे ·ौन सी साम्प्रदायि· ·ा खतरा हो स·ता था। परमट चौराहे पर बैठा ए· ·ुत्ता इतना दुखी था ·ि उस·ी ·िसी ·ो ·ाटने ·ी इच्छा ही मर गयी। वह ·ेवल भौं··र रस्म अदायगी ·र रहा था। भारत मैच क्या हारा ·ि पूरे शहर ने उदासी ·ी चादर में अपने पैर पसार लिए। महीनों ·े इंतजार ·ा इतना खराब अंत। रिजल्ट ·ा अंदाज पहले लग जाता तो टि·ट ·े लिए इतनी लाठियां तो न खाते। स्टूडेंट दीर्घा से मैच देख·र नि·ले ·ई छात्र यही सोच·र अपने-अपने पैरों ·ो सहला रहे थे। ·ुछ ऐसा ही हाल पब्लि· समेत ·ई दीर्घाओं ·े दर्श·ों ·ा था। अब तो घर जा·र चोट पर हल्दी-चूना लगाने से भी ·ोई फायदा नि·लने वाला नहीं था। मैच हारने ·ी पीड़ा मुर्गा और मटन मार्·ेट में भी थी। ·ई मुर्गों, मछलियों और ब·रों ·ा मूड खराब हो गया। उन्होंने ·टने से इन्·ार ·र दिया। आखिर क्यों न हो... उन·े वंशजों ने टीम इंडिया ·े लिए क्या-क्या नहीं ·िया। होटल वालों ·े साथ जबर्दस्ती ·ो-ऑपरेट ·िया। ·ु·र और देग ·े अंदर जाने त· शेफ अं·ल ·ी बात मानी... फिर भी भारत ·े हाथ से मैच नि·ल गया। पितर पक्ष में बड़ी संख्या में पुरखे भी अपना-अपना श्राद्ध छोड़·र ग्रीनपार्· चले गये थे... मैच देखने। उन·ी आत्माएं वहां मंडराती रहीं। चौ·ों-छक्·ों पर दिन भर तालियां पीटती रहीं... ले·िन शाम ·ो मिला क्या... बाबा जी ·ा...! भारत ·े मैच हारने ·ा अफसोस ·ेस्·ो ·ो भी है। क्या फायदा हुआ शहर ·ी बिजली न ·ाटने ·ा... मैच ही हारना था तो इनवर्टर या जेनरेटर ·े ·रंट में हारते... ·ेस्·ो ·ो क्यों बदनाम ·िया। वैसे भी उस·ी बदनामी ·ौन सी ·म है। यही हाल टेलीफोन विभाग ·ा भी था। मैच ·े लिए ·बसे व्यवस्था ·र रहे थे... इतनी मेहनत शहर ·े लिए ·रते तो शायद ·ॉल ड्रॉप या टेलीफोन डेड होने ·ी समस्या घट जाती। पुलिस ·र्मचारी अलग दुखी थे... इतने दिनों ·ी सख्त ड्यूटी ·ा क्या सिला मिला। भारत मैच क्या हारा...शहर ·ी ·ायनात वीर और उत्साह रस से सीधे ·रुणा रस में प्रवेश ·र गयी। मैच प्रसारित ·रने वालों ·ो छोड़·र अन्य टीवी चैनलों ·ी टीआरपी गिर गयी। मैच जीत जाते तो ‘बजरंगी भाईजान’ छूट जाने ·ा अफसोस न होता। दुखी तो स्टॉ· एक्सचेंज भी हुआ ले·िन संडे होने ·े ·ारण उस·ा दुख सार्वजनि· नहीं हो पाया। पता नहीं इस·ी भड़ास वह ·ब नि·ाल दे। मैच हारने ·ी ये पीड़ा शहरवासियों ·े जख्मों ·ो ·ब त· हरा रखेगी... ·हना मुश्·िल है। शायद अगला मैच इससे निजात दिला स·े... ले·िन वो ·ब होगा... क्या पता!

Friday, October 2, 2015

मंगल ·ा पानी वाया नगर निगम! ------------------------------ ये जान·र बहुत तसल्ली हुई ·ि नासा ·े वैज्ञानि·ों ·ो मंगल ग्रह पर पानी मिल गया। वैज्ञानि· और डॉक्टर जो ·हते हैं, वह सच ही होता है। उन्हें झूठा मानने ·ा रिवाज नहीं है हमारे यहां। अब मुझे लगता है ·ि शहर ·ी जल समस्या भी सुलझ जाएगी। चूं·ि मंगल पर पानी अमेरि·ा ·े वैज्ञानि·ों ने खोजा है तो मुम·िन है ए·ाध चुल्लू पानी पा·िस्तान ·े हिस्से में आ जाए। ले·िन, भारत ·ो ·म से ·म इतना तो मिलना ही चाहिए जिसमें दो-चार दर्जन पा·िस्तान डूब स·ें। हालां·ि, इस मसले पर पा·िस्तान ·ा पक्ष लिया जाए तो य·ीनन वो ·हेगा ·ि यूएनओ ·े माध्यम से मामला निपटाया जाना चाहिए। खैर! वापस लौटिये अपने शहर ·ी जल समस्या पर। वैसे तो शहर में पानी ·ी ·ोई ·मी नहीं है। नगर निगम ·ी ·ृपा से बजबजाते नाले-नालियां इस·े गवाह हैं। इन नाले-नालियोंं में पानी ·े अलावा ईश्वरीय पांच तत्व और ·ुछ मानव रचित तत्व भी होते हैं। ·ुत्ते और सुअर इस अनुपम छटा ·ा उसमें डूब·र मुजाहिरा ·रते हैं तो शहर ·े नर-नारी ना· पर रूमाल रख·र। वीर रस से ओतप्रोत ·ुछ युवा और अंगूर ·ी बेटी ·े दामन में अपना सब ·ुछ लुटा चु·े चंद देवदास भी ·भी-·भी नगर निगम ·ी इस झेलम ·ी सैर ·र आते हैं। ·हीं-·हीं महसूस होता है ·ि शहर में फुटपाथ भी हैं। उन पर हैंडपंप भी सजे हैं। उनमें से अधि·ांश हैंडपंपों पर व्यापारियों-दु·ानदारों ने अतिक्रमण ·ी चादर चढ़ा रखी है। इनमें से अस्सी परसेंट हैंडपंप वा·ई सजावटी हैं। ·िसी पर पान-मसाले ·ी दु·ान चलती है तो ·िसी पर ·पड़े सूख रहे होते हैं। अगर ·ोई हैंडपंप गलती से बिना घूंघट ·े मिल जाता है तो उससे गोबर ·ी गंध, खालिस गरम हवा या ‘अच्छे दिन’ ·ा अहसास ·राती ऐसी गंध आत्मा ·े सारे तार छेड़ जाती है... जैसी सड़े प्याज ·ो पोस्टमार्टम हाउस में रख देने ·े बाद डुएट बन·र उभरती है। से·ेंड वल्र्ड वार ·े गोले ·े खोखे से ले·र मच्छर ·ी पसली त· सब मिल जाता है इन हैंडपंपों में, बस पानी नहीं। अब जरा ए· नजर नगर निगम ·ी तैयारियों पर। मंगल से पानी जब आएगा, तब आएगा ले·िन संभव है ·ि निगम में इस·ा डीपीआर बनना शुरू जाए। मोटे तौर पर अंदाज तो लगाया ही जा स·ता है ·ि मंगल से ·ानपुर त· पानी लाने ·े लिए जो पाइपलाइन टंगेगी, उस पर पेंट ·रने ·ा ठे·ा ·िसे दिया जाए। ·ौन सी ·ंपनी ·ा पेंट ठी· रहेगा। पुराने वाले ठे·ेदार से ·ाम ·रवाया जाए तो ·हो छह महीने में ही ली· ·रने लगे। पता चला आधा पानी बीच में ही दूसरे ग्रह वालों ने ·िडनैप ·र लिया। माथा-पच्ची ·रने ·ो और भी ·ई झंझट हैं... जैसे पाइपलाइन ·ी ·ास्ट (नट-बोल्ट सहित), ·िस·ा ·मीशन रेस्पेक्टेबल है वगैरह-वगैरह। हो स·ता है ·ि ·ुछ संगठन मंगल से मिलने वाले पानी ·ी आधी मात्रा हिन्दुओं ·े लिए आरक्षित ·िए जाने ·ी मांग ·र बैठें क्यों·ि तमाम आदेशों और ·ानूनों ·े बावजूद गंगा जी लगातार सूखती जा रही हैं। जब·ि, नया-नया लो·तंत्र ·ा प्याज चखने वाला नेपाल ·ह स·ता है ·ि उस·ा सारा पानी बह·र भारत में चला जाता है, जिससे उस·े यहां जल सं·ट हो जाता है... अत: लो·तंत्र ·े बच्चे ·ी हैसियत से भी उस·ी मंगल ·े जल पर दावेदारी बनती है। ए· सुझाव मेरा भी है ·ि सुदूर ग्रह ·ा जल उन लोगों ·े नैनों में डाला जाए, जिन·ी आंखों ·ा पानी मर गया हो। बताता चलूं ·ि तैयारियां ·ेवल नगर निगम में ही नहीं, ·ई और विभागों में भी चल रही हैं। ·ई नामी-गिरामी बिल्डर मंगल पर अपार्टमेंट बनाने और वास्तुशास्त्री नक्शा बनाने ·े सपने देखने लगे हैं। बस ए· ही ·स· है ·ि पता नहीं मोदी जी इन सब·े लिए ओबामा ·ो मना पाएंगे!

Thursday, September 24, 2015

झल· दिखला जा... ए· बार आजा-आजा-आजा... ------------------------------------------- प्रिये! सच ·हता हूं... पूरा ए· सप्ताह हो गया तुम्हारे दीदार·ो। ेंमोहल्ले ·ा ट्रांसफार्मर फुं·ने ·े बाद उमस भरी गर्मीमें यह समय मैंने ·ैसे तड़प-तड़प·र ·ाटा है... इसे मेरा दिल ही जानता है। दिनमें धूल-धक्·ड़ और रातमें मच्छर! भगवान ऐसा जुल्म ·िसी जुल्मी पर भी न ·रे। पता नहीं तुम मेरे साथ ·िस जुल्म·ा बदला ले रही हो ·ि तुम्हारी ए· झल· पाने·ो मैं तरस गया हूं। ·ेस्·ोसे मेरा ·ोई बैर नहीं है। सारे बिल भी समयसे जमा ·रता हूं। इंस्पेक्टर साहब मीटर·ी रीडिंग लेने जब भी आते हैं... मैं उन्हें ·ोल्ड ड्रिं· और नम·ीन·े साथ पत्र-पुष्पभी अर्पित ·रता हूं। ऐसेमें तुम्हारी बेवफाई मेरी समझसे परे है। डार्लिंग! तुम नहीं जानतीं ·ि तुम्हारे वियोगमें मेरे घर·ी क्या हालत हो गई है। फ्रिज बंद पड़ा है। जब तुम ही नहीं हो तो उस·ा क्या लाभ? न ठंडा पानी मिल स·ता है और न सब्जी-फल वगैरह उसमें रखे जा स·ते हैं। साढ़े चार बाई डेढ़ फिट·ा वह डिब्बा मुंह अलग चिढ़ाता रहता है। हार·र मैंने उससे गोदरेज·ी अलमारी·ा ·ाम लेना शुरू ·र दिया है। अब उसमें ·पड़े और ·िताबें रखने लगा हूं। ऐ मेरी दो सौ बीस वोल्ट·ा झट·ा मारने वाली हुस्नपरी! सच ·ितने दिन हो गए तेरा झट·ा खाए। मैंने अपने घर·ी टूटी-फूटी वायरिंग सिर्फ इसलिए ठी· नहीं ·रवाई क्यों·ि तुम्हारे झट·ोंमें जो ·शिश है... वो पड़ोसनमें भी नहीं...हालां·ि उस·ा ·रंट भी चार सौ चालीस वोल्ट ·ा होता है। मेरे सपनों·ी रानी! तुम नहीं जानतीं ·ि तुम्हारे बिना घर·ा टीवीभी बेजान है। श्रीमती जी·ो ‘सास-बहू’ देखे ·ई दिन हो चु·े हैं। शायद तुम्हें ·ल्पनाभी न हो ·ि वह ए· बार मुझे तो छोड़ स·ती हैं ले·िन सास-बहू·े सीरियल नहीं। तुम मानो या न मानो ले·िन सच ये है ·ि जिस वक्त सीरियल आने ·ा टाइम होता है... वह दूरबीन लगा·र सामने वाले पड़ोसी·े टीवीसे अपने नेत्रों·ो उप·ृत ·रती हैं। पड़ोसी ·े यहां जेनरेटर नाम· सौत है। और, सीरियल·े बीच ‘छोटा सा ब्रे·’ आता है तो सुराही·ा पानी पी-पी·र मुझे और तुम्हें बिना ब्रे· लिए ·ोसती हैं। हे ·ेस्·ो·ी पटरानी! तुम नहीं जानतीं ·ि तुम्हारी जुदाई मेरे पूरे परिवार पर भारी है। मेरा बेटा पसीना पोंछते और मच्छर मारते हुए ·ंपटीशन·ी तैयारी ·र रहा है। अगर उस·ा ·ॅरियर बिगड़ता है तो उस·े लिए तुम और ·ेवल तुम ही जिम्मेदार होगी। मजबूरी है ·ि मेरी हैसियत न इनवर्टर लगवाने·ी है और न जेनरेटर अफोर्ड ·रने·ी। तुम ही मेरे दुखों·ी नैया पार लगा स·ती हो। रहम ·रो। ऐ हैसियत देख·र प्रति यूनिट अपने दाम निर्धारित ·रने वाली नटवरी! अब तुम्हारी जुदाई बर्दाश्त ·ोटेसे बाहर हो चु·ी है। ·भी-·भी सोचता हूं ·ि आत्महत्या ही ·र लूं ले·िन ये सोच·र इस विचार·ो त्याग देता हूं ·ि ·हीं परिवार ·े लोग मेरा पार्थिव शरीर तुमसे चलने वाले शवदाह गृह ले गए तो वहांभी तुम नहीं मिलोगी। और, फुं·ने·े इंतजारमें मेरी लाश अलग सड़ जाएगी। हो स·ता है ·ि अगला जन्मभी ले लूं और तुम्हारे दर्शन न हों। मेरी विपदा·ो समझो। तुम्हारी ए· झल· पाने·ो मैं सौ जिंदगियां ·ुर्बान ·र स·ता हूं। ले·िन तुम्हारे बिना मर नहीं स·ता। इसलिए ए· बार तो झल· दिखला जा। भगवान ·े लिए ए· बार आजा, आजा, आजा... आजा! - ·मल ·िशोर सक्सेना

Tuesday, December 21, 2010

'पÓ से 'प्याजÓ, 'लÓ से 'लहसुनÓ

मेरे सामने एक प्याज है। इसे मैं एक हफ्ते से टकटकी लगाकर देख रहा हूं कि आखिर बनाने वाले नेे क्या सोचकर इसे 'टियर गनÓ थमा दी। वरना, कितनी खूबसूरत फिगर है। ज्यों-ज्यों कपड़े उतरते जाते हैं, त्यों-त्यों निखार आता जाता है। लेकिन, इतनी मस्त अदाओं वाला प्याज इस समय सबको जार-जार रुला रहा है।
मैं भी रो रहा हूं। एक हफ्ते से सोच रहा हूं कि परिवार के इस इकलौते प्याज को खर्च करूं या ड्राइंग रूम में सजा दूं। किचेन के स्तर से तो ऊपर उठ चुका है वो। पक्का फ्रेम करवाकर दीवार पर लगवाने का इरादा इसलिए नहीं है कि अभी मुझे प्याज के किचेन में वापस लौटने की उम्मीद है। आशावादी हूं न। इसीलिए।
खैर, इसे इसके एक किलो साथियों के साथ पिछले महीने खरीदा था सब्जीमंडी से। बाकी साथी तो पेट की जंग की भेंट चढ़ गए। अब ये इकलौता बचा है। मेरी आंखों का नूर, मेरा कोहिनूर, जाने-जिगर, घर का इकलौता चिराग, चश्मे-बद्दूर। कहने की जरूरत नहीं कि आजकल मैं प्याज की पूजा रहा हूं। खाने के लिए सोचना भी पाप है। लहसुन भी इन दिनों प्याज का मौसेरा भाई बनकर उभरा है।
खाते-पीते घरों के लोग जानते हैं कि लहसुन-प्याज विहीन भोजन करना कितना कष्टप्रद होता है। फिर मैं तो उस खानदान को बिलांग कराता हूं, जहां बकरे का मतलब बिरयानी और लेग पीस का मतलब सिर्फ मुर्गा समझा जाता है। और, दुनिया के तमाम बावर्चीखाने गवाह हैं कि बिना लहसुन-प्याज के बकरे, मुर्गे तो छोडिय़े, झींगा मछली तक कुकर में जाने को राजी नहीं होती।
कल मेरे कुकर ने मुझसे पूछा- कितने दिन मुझे और दाल-भात पर जिंदा रहना पड़ेगा। तुम्हें शाकाहार का संदेशा देना हो तो शौक से दो लेकिन मुझे तो हफ्ते में मिनिमम दो दिन नॉन वेज चाहिए ही चाहिए। कहते हुए कुकर के ढक्कन से लार टपकने लगी। मुझे अफसोस भी हुआ। बेचारा कुकर। यही तो दिन हैं इसके खाने-खेलने के। ऐसे अनेक अवसर आये, जब कुकर का मन नहीं होता था तो भी बकरे का भेजा या मुर्गे की टांग जबर्दस्ती उसमें घुस जाते थे। प्रेशर लगाना पड़ता है। मजबूरी है। आप ही बताइये, वह कौन पत्थर दिल पेटू होगा जो ये सीन देखकर कुकर में सीटी न लगा दे। यही हाल कड़ाही का था। मछली के मूड़ों के बीच खेली-पढ़ी मेरी कड़ाही को आजकल पालक और करमकल्ले से काम चलाना पड़ रहा था। मिक्सी कल पूछ रही थी कि क्या मुझे खाली जूस निकालने के लिए रख छोड़ा है। आजकल मसाला क्यों नहीं पीसते। प्याज महंगा है तो चटनी ही पीस लो। भारी दिन चल रहे हैं क्या। अब मैं इस कम्बख्त कड़ाही और मिक्सी को कैसे समझाऊं कि हम जैसे आम आदमियों के लिए इससे भारी दिन और क्या होंगे।
प्याज महंगा होने से केवल किचेन का ही कुकर नहीं रो रहा है। कूकुर अर्थात कुत्ते भी रो रहे हैं। जो बंगलों की चारदीवारी में बंद रहते हैं, उनकी बात मैं नहीं जानता लेकिन गली के कुत्तों का तो स्वाद चला गया है। कल मैंने कूड़े के ढेर के पास एक कुत्ते को बेमन से टहलते देखा। भोज्य पदार्थों, अंत: और वाह्य वस्त्रों के टुकड़ों, कॉस्मेटिक सामान और कम्प्यूटर के पुर्जों सहित कई चीजें उस कूड़े की शोभा बढ़ा रही थीं लेकिन कुत्ते के चेहरे से उदासी की पर्तें हट नहीं रही थीं। पास ही एक सुअरिया अपनी दिनचर्या जी रही थी। सुअरिया तृप्त होकर खुश थी। कुत्ता उदास। एक तरफ आशा की ताल-तलैया थी। दूसरी तरफ निराशा की सुनामी। एक ओर मुंह लटकाये कुत्ता था तो दूसरी ओर चहचहाती-इठलाती सुअरिया। इधर खुशी, उधर मातम।
थोड़ी देर में सुअरिया ने कुत्ते से पूछा- 'कुत्ता सर! अब तो फिर एनडीए की सरकार बन गई है। लोगों में खौफ नहीं है। वे आधी रात तक घूमने-फिरने लगे हैं। अब तुम्हारे पास उन्हें काटने और भौंकने का चौबीसों घंटों इस्कोप है। चारों ओर सुशासन की बयार नहीं बल्कि आंधी चल रही है। कल मैं टहलते हुए नदी तक चली गयी थी। वहां कई सरकारी कर्मचारी एक अजगर से काम करवाने पर तुले थे। लेकिन वह भी था सरकारी अजगर। वह भी उस जमाने का, जब विभागों में काम न करने का रिवाज था। अजगर टस से मस होने को तैयार न था। इधर कर्मचारियों को भी नया-नया डीए मिला था। वे भी डीए के जोश में थे। बड़ी जोर-आजमाइश हुई। लेकिन होइये वही जो राम रचि राखा। अर्थात, इस युद्ध में विजय की जयमाला अजगर के गले में पड़ी। कर्मचारी ये कहते हुए वापस लौट गए कि दो बार डीए और बढऩे दो। इतने में तो इसे हिलाना भी मुश्किल है। खैर, उस अजगर से मेरी काफी देर बात हुई। तमाम मुद्दों पर। वह आजकल बीमार है। अल्ट्रासाउंड कराया था। डॉक्टर का कहना है कि बिना प्याज का मीट-मछली खाने से इसके पेट में इनफेक्शन हो गया है। दवा चल रही है। सुबह-शाम हरे प्याज वाला सागा खा रहा है और दूध में च्यवनप्राश ले रहा है।Ó
सुअरिया ने ढेर पर आकर गिरी नई लाट को देखकर एक बार अपने होंठों पर जीभ फेरी फिर आगे बोली- 'भाई ये प्याज-व्याज तो चोंचले हैं तुम लोगों के। हम लोगों को देखो। एक ही फेवरिट डिश। हजारों-लाखों सालों से चली आ रही है। न मैन्यू बदला। न अंदाज। सर्वत्र उपलब्ध। न बीपीएल कार्ड की जरूरत न एपीएल की। न चोर चुराये न डाकू ले जाये। न सडऩे का खतरा। न खराब होने का डर। न फ्रिज की जरूरत, न ओवन की। आदमी कुछ भी खाये, उसे कनवर्ट हमारी डिश में ही होना है। प्याज-लहसुन महंगा हो हमारी बला से। लेकिन तुम क्यों उदास हो। देखो दिसंबर खतम हो रहा है। किसी युवती की मादक अंगड़ाई की तरह ठंड अंग-अंग में चुभने लगी है। कितना रोमांटिक मौसम है। खास तौर से तुम कुत्ता समुदाय के लिए। अरे तुम्हें तो अपनी कुतिया को लेकर गोवा या शिमला निकल जाना चाहिए था। यहीं रहना था तो पटना के गांधी मैदान में रैली करते। आने वाले साल को 'अंतर्राष्ट्रीय कुत्ता वर्षÓ घोषित किए जाने की मांग करते... मगर तुम यहां मुंह लटकाये यहां घूरे के ढेर पर उदास बैठे हो। अच्छा बस इतना बता दो कि क्या तुम्हारी कुतिया किसी और के साथ भाग गई है या तुम्हारा पिल्ला पड़ोसी को पापा बोलता है। भगवान के लिए बता दो फिर मैं अपने प्रियतम के पास चली जाऊंगी। देखो कितनी देर से मेरा प्रियतम मैनहोल में युगल स्नान करने के लिए मुझे बुला रहा है।Ó
कुत्ते ने एक लंबी सांस ली और कहना शुरू किया- 'तुम्हें पता है कि किसी कुत्ते के लिए दुनिया की सबसे बड़ी सजा क्या है? उसे हड्डी से दूर कर देना। और हड्डी की सबसे बडी सजा है उसे लहसुन-प्याज से दूर कर दिया जाए। और मैं, एक कुत्ता होकर ये दोनों सजाएं एक साथ भोग रहा हूं। घोर नाइंसाफी है। पहले झुग्गी- झोपडिय़ों की जूठन में भी लहसुन-प्याज के छिलके के दर्शन हो जाते थे। लेकिन अब तो बंगलों के बाहर भी मूली और गोभी के पत्तों का पहरा है। अरे तुम क्या जाना कि दुनिया कितने तरह के स्वादों से भरी हुई है।Ó
कहते हुए कुत्ता बिना बल्ब वाले सट्रीट लाइट के खंभे के नीचे बैठ गया। पास ही किसी मैगजीन का फटा हुआ पेज पड़ा था। उस पेज पर प्याज की फोटो छपी थी और पीछे से गीत की आवाज आ रही थी- 'मैं तो एक ख्वाब हूं, इस ख्वाब से तू प्यार न कर!Ó

Saturday, October 30, 2010

दरोगा भर्ती लिखित परीक्षा (बिहार)

नोट : हर खंड के सभी सवालों का जवाब देना जरूरी है। हर सवाल के अंक अलग-अलग हैं, जो आपकी एड़ी की नाप और खून में हीमोग्लोबिन की मात्रा जांचने के बाद निर्धारित किये जायेंगे।

खंड (क) सामान्य ज्ञान

(1) पोस्टमार्टम हमेशा मरने बाद ही क्यों किया जाता है?
(2) मृत्युपूर्व बयान जीवित अवस्था में क्यों दर्ज करवाना चाहिए?
(3) दो पुलिस वालों को मौसेरा भाई क्यों नहीं कहा जा सकता?
(4) एक आदर्श पुलिसकर्मी को अपने सेवाकाल में कितनी बार निलंबित और लाइन हाजिर होना चाहिए?
(5) इनकाउंटर में मरने के लिए अपराधी होना क्यों आवश्यक है?

खंड (ख) व्यावहारिक ज्ञान

(1) मां और बहन की गाली से आप क्या समझते हैं? ये अपने घर में क्यों नहीं दी जा सकतीं?
(2) 'वर्दी पर धब्बाÓ लगाने के पांच सर्वश्रेष्ठ तरीके कौन से हैं? तथा, पिछले वित्तीय वर्ष में इन धब्बों को छुड़ाने के लिए विभाग को कुल कितनी राशि खर्च करनी पड़ी?
(3) 'मुठभेड़Ó आउटडोर गेम है या इनडोर? इसे अपराधियों के अलावा और किन- किन लोगों के साथ खेला जा सकता है?
(4) क्या विभागीय महिलाओं को भी उन्हीं नजरों से देखा जाना चाहिए, जिन नजरों से कुछ पुलिस वाले अन्य को देखते हैं?
(5) प्रदेश के पांच नामचीन अपराधियों की जीवनी और उपलब्धियां संक्षेप में लिखिये। कोई भी जीवनी दो सौ शब्दों से ज्यादा बड़ी न हो। बेशक अपराधी चाहे जितना बड़ा क्यों न हो।

खंड (ग) आरक्षित ज्ञान

(1) 'आदमी हूं आदमी से प्यार करता हूंÓ की अवधारणा पर जो लोग विश्वास करते हैं, उन्हें समाज में क्या कहा जाता है? चित्र बनाकर इस अवधारणा को स्पष्ट कीजिये।
(2) ट्रक के नीचे खड़े होकर लिए जाने वाले धन को भी ऊपरी आमदनी क्यों कहते हैं? ये अधिकतम कितनी ऊंचाई तक की जा सकती है, जिसमें निगरानी या इंटेलिजेंस का खतरा न हो?
(3) पांच अपराधी प्रति माह फरार होने की दर से पूरी जेल खाली होने में कितने वक्त की दरकार होगी?
(4) टिप्पण्ी लिखिये : कमीना, कुत्ता, पितृ नाम से अनभिज्ञ, मसालेदार मदिरा, डंडे का महात्म्य।
(5) थाने में ताला डालने में क्या-क्या कानूनी अड़चनें सामने आती हैं?

असली राशिफल- अपने कर्मों के आधार पर देखें

मेष : - इस राशि वालों के पंचम घर में राजद और छठे में बची-खुची लोजपा है। दूसरी ओर जद-यू और भाजपा का पंचक भी किलकारी मार रहा है। अत: थूक कर चाटने से बचें। आवश्यकता होने पर ही थूकें। किसी तरह काम न चले तो उसे गटक लें। ये प्राकृतिक विटामिन का काम भी करता है। आश्वासन और भाषणबाजी से कुछ दिनों के लिए तोबा कर लें। समाज से ध्वनि प्रदूषण कम करने में अपना हाथ बंटायें।

कर्क :- आपकी कुंडली में काले धन और काली महिला का योग है। यदि आप भी काले हैं तो कहना ही क्या। आपके दोनों हाथों में लड्डू है। अमावस की रात में चेहरे पर कालिख पोत कर और काला कंबल ओढ़कर, बिना स्ट्रीट लाइट वाली सड़क के खुले मैनहोल के पास काले कुत्ते को काली मसूर की दाल खिलायें। साथ में आप भी खायें। मनोकामना पूर्ण होगी। जमीन पर चलने से बचें। रात में एक पैर बांधकर सोयें।

तुला :- बड़ा लड़का प्रेम विवाह करेगा। जिसके कारण दहेज हानि का योग है। छोटे की शादी में भरपूर मिलेगा लेकिन वह सब बारात बिदा कराकर लौटते समय लुट जायेगा। उसमें अगर आप बच गये तो जिंदा रहेंगे। बेहतर हो कि बचे हुए कामकाज जल्द से जल्द निपटा लें और संपत्ति का बंटवारा कर दें। किसी पर भरोसा न करें। खुद पर भी नहीं। पंद्रह दिन तक आधी रात को देसी दारू पीकर बुलंद आवाज में पड़ोसियों को गालियां दें। सोलहवें दिन बिना किसी प्रयास के आप पोस्टमार्टम हाउस पहुंच जायेंगे। वहां से मोक्ष पाने का प्रयत्न करें।

मकर :- उदर विकार रहेगा। पेट में बातें पचाने में कठिनाई होगी लेकिन परनिंदा में आनंद आयेगा। हां, पड़ोसियों से संबंध खराब होने का पूरा-पूरा खतरा है। जीवन साथी आपके चरित्र पर शक करेगा। किंतु उसकी परवाह न करते हुए नये संबंधों को बदस्तूर जारी रखें। बच्चों को प्रेम विवाह के लिए उकसायें क्योंकि दहेज के जमाने में बेटी को डोली में बिठाना आपके बूते में है नहीं। बड़ा लड़का भी किसी लड़की को भगा कर लायेगा। अग्रिम जमानत का बंदोबस्त कर लें क्योंकि अपहरण का मुकदमा आप पर भी लदने का अंदेशा है।

वृष :- बुरी तरह अपमान का योग है। पुलिस से सहायता हरगिज न मांगें। अपरिहार्य हो तो किसी अपराधी को कांफीडेंस में लें। मनोदशा पिछले अपमान जैसी ही रहेगी। अर्थात, दूसरों की पत्नियों को आप घूरेंगे और दूसरे आपकी। ऐहतियात और संयम से काम लें। वरना मोहल्ले के साथ-साथ घर में भी चप्पलें पडऩे का खतरा है। एक आंख बंद करके किसी पैदायशी एक आंख वाले को एक समय का भोजन करायें और उसे भोजपुरी गानों की सीडी भेंट करें।

सिंह :- आपका खराब समय शुरू हो चुका है। दफ्तर में बॉस से कहासुनी होगी। तो आपकी नौकरी कितने दिन चलेगी। नौकरी नहीं रहेगी तो घर में बीवी क्यों रहेगी। वह मायके जाने की धमकी देकर आपके बॉस के घर की शोभा बढ़ायेगी। ऐसी स्थिति आने से रोकने के लिए रोज सुबह-शाम बॉस के साथ उनकी पत्नी की भी आरती उतारें। बुधवार की दोपहर को पत्नी पीडि़त दोस्तों के साथ बैठकर 'बेवफा बीवीÓ कहानी का पाठ करें। पाठ की समाप्ति कर सब मिलकर दो-दो पैग दारू का प्रसाद ग्रहण करें।

वृश्चिक :- आप गल्ती से मनुष्यों में पैदा हो गये हैं। इस सच्चाई को शीघ्र से शीघ्र स्वीकार करें और मोहल्ले के कुत्तों की सोहबत करें। उनकी चाल-ढाल, बोलचाल, आचार-विचार और चरित्र का अध्ययन करें। एक पैर उठाकर आवश्यक कार्य निपटायें। भोजन करते समय हाथों का इस्तेमाल बिल्कुल न करें। कोशिश करें तो लेटकर भी सुगमता से खाना सीख जायेंगे। आधी रात को उठकर मोहल्ले के कुत्तों के सुर में सुर मिलाने का अभ्यास करें। इसे उस दिन सफल मानें, जिस दिन कोई कुतिया आपकी आवाज से मुतस्सर होकर खिंची चली आये। चार पहिया वाहनों से सावधान रहें।

कुम्भ :- आपके पंचतत्वों, क्षिति-जल-पावक-गगन-समीरा में जल का तत्व गौण है। आंखों में तो कभी था ही नहीं। अर्थात आपमें राजनीति करने के पूरे लक्षण हैं। एकाध आपराधिक मुकदमे भी खुद पर चलवाने का प्रयास करें। आपके अंदर चूंकि जल का तत्व गायब है इसलिए आपको जल से परहेज रखना चाहिए। पानी तभी पियें जब प्यास लगे। नीट पानी तो हरगिज न पियें... उसमें रम, व्हिस्की या ठर्रा आदि पौष्टिक पेयों का अवश्य समावेश करें। स्नान करने की कतई न सोचें। आपके लिए एक चुल्लू ही काफी है। ऐसे में बाथरूम के भीतर कदम रखना आपके लिए हितकर नहीं है।